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MSME Full Form : Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises.



What is the meaning of MSME : Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises.



क्या है MSME-
सूक्ष्म-लघु और मध्यम उद्यम (MSME) छोटे आकार की इकाइयां हैं, जो उनके निवेश के आकार के संदर्भ में परिभाषित हैं। वे अर्थव्यवस्था में उत्पादन, रोजगार निर्यात इत्यादि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वे बड़ी संख्या में अकुशल और अर्द्ध कुशल लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
एमएसएमई कारोबारियों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा कई तरह से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्र का देश के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। लघु उद्योग क्षेत्र के योगदान को देखते हुए सरकारी बैंक के साथ ही साथ प्राइवेट क्षेत्र की नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियां (एनबीएफसी) भी कम ब्याज दर बिजनेस लोन प्रदान कर रही हैं।

एक अहम बात यह है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए उद्योग का एमएसएमई रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होता है। लघु उद्योग को परिभाषित करने के लिए सरकार द्वारा निश्चित परिभाषाएं निर्धारित की गई हैं। लघु उद्योग की परिभाषा इस तरह की हैं।

MSME के प्रकार

  • मैनुफैक्चरिंग उद्योग (Manufacturing Enterprise)- मैनुफैक्चरिंग उद्योग में नई चीजों को बनाने यानी निर्माण करने का कार्य किया जाता है।
  • सर्विस सेक्टर (Service Enterprise)- सर्विस सेक्टर में मुख्य रुप से सेवा प्रदान करने का कार्य किया जाता है। इसे सेवा क्षेत्र के रुप में भी जाना जाता है। इस सेक्टर में लोगों को और विभिन्न संस्थाओं को सर्विस देने का काम होता है।
एमएसएमई के प्रकार समझने के बाद आइए अब आकार यानी साइज के हिसाब से एमएसएमई को समझते है। यह परिभाषा भी MSMED अधिनियम 2006 के अनुसार ही तय की गई है।
सूक्ष्म उद्योग: हम उन सभी उद्योग को सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत रखते है जिन उद्योग में 25 लाख तक के मशीनरी लगी होती है। यह परिभाषा मैनुफैक्चरिंग उद्योग के लिए लागू होती है।
सर्विस सेक्टर के लिए परिभाषा बदल जाती है। सर्विस सेक्टर में मशीनरी या सेटअप में 10 लाख तक निवेश यानी इन्वेस्ट होने पर हम उन्हें सूक्ष्म उद्योग की श्रेणी में रखते है।
मैनुफैक्चरिंग लघु उद्योग: मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में हम उन उद्योगों को लघु उद्योग की श्रेणी में रखते है जिन उद्योग में 25 लाख से 5 करोड़ रुपये तक की मशीनरी खरीद होती है।
सर्विस सेक्टर में लघु उद्योग: सर्विस सेक्टर में उन कारोबार को लघु उद्योग की श्रेणी में रखते हैं जिन कारोबार में 10 लाख से 2 करोड़ के बीच मशीनरी और अन्य चीजों की खरीद होती है।

मध्यम उद्योग:  मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में मध्यम उद्योग उन कारोबार को कहा जाता है जिनमें 5 करोड़ से 10 करोड़ के बीच की मशीनरी और अन्य जरूरी चीजों पर खर्च किया जाता है।
सर्विस सेक्टर में मध्यम उद्योग: सर्विस सेक्टर यानी सेवा उद्योग में हम उन कारोबार को मध्यम उद्योग की श्रेणी में रखते है जिनमें अधिकतम 5 करोड़ तक की मशीनरी और अन्य तरह की चीजों की खरीद की जाती है।
इस परिभाषा के अतिरिक्त केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में परिभाषा को एडिट किया गया है। सरकार का तर्क है कि अब उद्योगों को आकार के आधार पर नहीं बल्कि वार्षिक टर्नओवर के आधार पर पहचाना जाना चाहिए। टर्नओवर के आधार पर परिभाषा निम्न है:
  • सूक्ष्म उद्योग: 5 करोड़ तक सालाना टर्नओवर वाले उद्योग
  • लघु उद्योग: 5 करोड़ से 75 करोड़ तक सालाना टर्नओवर वाले उद्योग
  • मध्यम उद्योग: 75 करोड़ से 250 करोड़ तक सालाना टर्नओवर वाले उद्योग

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