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दोस्तो, नमस्ते का उपयोग अतिथि एवं श्रद्धेय के अभिवादन के लिए किया जाता है.  भारतीय संस्कृति में नमस्ते का उपयोग ही सामान्यतः उपयुक्त माना गया है, परंतु पिछले कुछ समय में कोरोना वायरस के फैलने की वजह से यह देखा जा रहा है कि नमस्ते की प्रथा विदेशी संस्कृति को भी अपनानी पड़ रही है.  जिसका विशेष कारण है, स्वयं को दूसरों से दूर रख कर उसका प्रेम पूर्वक अभिवादन करना.

आखिर क्या है नमस्ते शब्द का अर्थ और किन  देशों में सामान्यतः नमस्ते करके ही अभिवादन किया जाता है.

नमस्ते शब्द संस्कृत भाषा के शब्द से उत्पन्न हुआ है.  संस्कृत में नमः + ते का अर्थ होता है, तुम्हें प्रणाम. इस पूरे शब्द को मिलाकर नमस्ते शब्द बनता है. सामान्यतह भारतीय संस्कृति में नमस्ते, प्रणाम, नमः जैसे शब्दों का उपयोग कर अभिवादन किया जाता है. ज्यादातर नमस्ते प्रथा दक्षिणी एशिया के देशों में प्रचलित है. यह भारत और नेपाल की सभ्यता में निहित हैं.

नमस्ते केवल एक सामान्य मुद्रा नहीं अपितु एक ऐसी मुद्रा है जिसका संबंध विज्ञान से है.  नमस्ते के लिए सामान्यत: लोगों को अपने दोनों हाथों को आपस में जोड़ना होता है. इन जुड़े हुए हाथों को हृदय के समीप रखकर आंखें बंद करके सर झुकाना होता है. जब भी कोई व्यक्ति हाथों को जोड़कर उसे ह्रदय के पास रखता है तो उसके मस्तिष्क को शांत रखने के उचित संकेत मिलते हैं जिससे स्वयं ही उस व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और अगर वह व्यक्ति क्रोध अवस्था में था तो वह तुरंत ही शांत अवस्था में आ जाता है.

नमस्ते कब किया जाता हैं :


किसी व्यक्ति के आने पर उसे अभिवादन के लिए नमस्ते किया जाता है साथ ही उसके जाने पर भी नमस्ते करके ही उसका अभिवादन किया जाता है अर्थात अतिथि सत्कार के समय नमस्ते किया जाता हैं.

अतिथि सत्कार के अलावा हिंदू धर्म में भगवान का अभिवादन भी हाथ जोड़कर नमन करके ही किया जाता है, इसमें भी नमस्ते की मुद्रा का ही उपयोग होता है.

नमस्ते एवं हैंडशेक में अंतर :


पाश्चयात संस्कृति में किसी का अभिवादन करने के लिए हैंड शेक किया जाता है, यानी कि दो व्यक्ति आपस में एक दूसरे को हाथ पकड़ कर हिलाते हुये अभिवादन करते हैं

लेकिन वर्तमान स्थिति में जब दुनिया के कई देशों में कोरोनावायरस की विपदा आई है, तभी से या देखा जा रहा है कि पाश्चयात संस्कृति के लोग भी हैंड शेक के बजाय नमस्ते को अपना रहे हैं और विज्ञान भी हैंड शेक की बजाय नमस्ते को ही उपयुक्त मानता है. ऐसा क्यों ?

क्यूँ विज्ञान नमस्ते को उपयुक्त मानता हैं –


ऐसा इसलिए है क्योंकि हैंड शेक के दौरान व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से सीधा संपर्क में आता है और हाथ ही एक ऐसा जरिया है जिसमें ज्यादातर वायरस होते हैं और अगर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को हैंड शेक करता है तो वायरस स्थानांतरित होते हैं और एक शरीर से दूसरे शरीर  में प्रवेश करते हैं.

इसके अलावा यह तो वर्तमान स्थिति की वजह से है लेकिन भारतीय संस्कृति में हमेशा ही हैंड शेक की बजाय नमस्ते की प्रथा प्रचलित है. ऐसा क्यों इसके पीछे भी एक वैज्ञानिक कारण है, हम सभी जानते हैं कि मनुष्य में उर्जा का प्रवाह निरंतर होता रहता है. मनुष्य में बहुत तरह की ऊर्जा होती है जिसमें कई तरह की उर्जा सकारात्मक होती है और कई तरह की ऊर्जा नकारात्मक होती है. अगर कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से अभिवादन करते समय हैंड शेक करता है या  किसी भी तरह का स्पर्श करता है तो उसके शरीर की एनर्जी अथवा उर्जा दूसरे के शरीर में प्रवेश कर जाती है जिससे जिस भी व्यक्ति के शरीर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. उसे हानि होती है साथ ही जिसके शरीर से सकारात्मक ऊर्जा दूसरे व्यक्ति के शरीर में चली जाती है अथवा स्थानांतरित हो जाती है उसे भी इसका नुकसान होता है.

मनुष्य के शरीर में ऊर्जा का महत्व बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है इसीलिए नमस्ते कर अपनी उर्जा को अपने ही शरीर के अंदर प्रवाहित करने की परंपरा विज्ञान संगत है इसलिए नमस्ते हिन्दू संस्कृति में उपयुक्त माना गया हैं.

नमस्ते की मुद्रा क्या होती हैं :


नमस्ते की मुद्रा को अंजलि मुद्रा कहा जाता है.  

गहरी लंबी सांस के साथ दोनों हाथों को दबाकर आपस में जोड़कर हृदय के पास रखा जाता है, उँगलियाँ उपर की तरफ सीधी होती हैं. अंगूठा हृदय से सटाकर रखा जाता हैं.

सिर एवं गर्दन को झुका कर आंखें बंद की जाती है और नमस्कार बोला जाता हैं.

इस पूरी मुद्रा को अंजलि मुद्रा कहा जाता है और इसी का उपयोग नमस्ते, प्रणाम, सतश्रीअकाल आदि अभिवादन के समय उपयोग किया जाता है.

नमस्ते के फायदे :


नमस्ते की मुद्रा एक योगासन है, नमस्ते करते समय मनुष्य के दिमाग में उत्पन्न तनाव कम होता है और उसे सहज महसूस होता है.

नमस्ते की मुद्रा से मन एकाग्र चित्त होता है जिससे ध्यान केंद्रित होने के कारण शरीर को काफी लाभ प्राप्त होता है.

नमस्ते की मुद्रा के कारण व्यक्ति तनाव मुक्त होता है उससे स्वतह ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव दिखते हैं और इस तरह से किसी का अभिवादन करने से मनुष्यों के बीच रिश्ते गहरे बनते हैं.

नमस्ते की मुद्रा से हाथ, कलाई एवं उंगलियों की निर्धारित अवस्था के कारण उसमें लचीलापन आता है यह एक तरह का हाथों का योग माना गया हैं.

हिंदू संस्कृति में अभिवादन की मुद्रा नमस्ते के बहुत सारे लाभ है और हैंड शकिंग से होने वाले नुकसान से भी नमस्ते मुक्ति दिलाता है इसलिए आज के समय में पश्चिमी सभ्यता भी नमस्ते को अपने संस्कृति में शामिल कर रही है.

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